भीषण गर्मी में एसी में बैठने पर ही राहत मिलती है। लेकिन कुछ देर तक एसी में बैठे रहने से या रातभर एसी में सोने से सुबह जोड़ों में दर्द और जकड़न पैदा हो जाती है। कई बार हाथ पैरों में और जोड़ों में दर्द शुरू हो जाता है। अगर आपको भी एयर कंडीशन में बैठने के कारण घुटनों में अकड़न, गर्दन में जकड़न या कंधों में जकड़न महसूस होती है तो ऐसा आम है। ज्यादातर लोगों को एसी में ऐसी समस्याएं होती हैं। कई रिसर्च से पता चला है कि घर के अंदर कम तापमान जोड़ों के दर्द को बढ़ा देता है। इससे गठिया और सूजन की समस्या बढ़ जाती है।
ठंडे तापमान से मांसपेशियां अकड़ सकती हैं
मेदांता गुरुग्राम के ऑर्थोपेडिक्स निदेशक डॉक्टर विनेश माथुर ने बताया कि घर के अंदर ठंड का मौसम जोड़ों के आसपास की मांसपेशियों को प्रभावित कर सकता है। ठंडा मौसम मांसपेशियों को सिकोड़ता है, जिससे गति की सीमा कम हो जाती है। मांसपेशियों के सख्त होने से चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है। मांसपेशियों में अकड़न के कारण आपको घुटने मोड़ने या सिर घुमाने में भी कठिनाई हो सकती है।
जोड़ों की मौजूदा समस्याएं क्यों और भी बदतर महसूस हो सकती हैं
जिन लोगों को पहले से ही गठिया, सूजन या किसी प्रकार की चोट है, वे तापमान में बदलाव के प्रति अधिक संवेदनशील होते हैं। डॉक्टर माथुर के अनुसार, ठंडे मौसम से ब्लड फ्लो अस्थायी रूप से प्रभावित हो सकता है, जिससे कुछ संवेदनशील जोड़ों में अकड़न आ सकती है। इसके अलावा कम फिजिकल एक्टिविटी भी इसका एक कारण हो सकती है। ऑफिस में कंप्यूटर के सामने बैठना, एसी चल रही कार में बैठना या यहां तक कि घर में एयर कंडीशनर की आरामदायक हवा में रहना भी जोड़ों में अकड़न पैदा कर सकता है।
जॉइंट लुब्रिकेंट का प्रभाव
एक महत्वपूर्ण बात जिस पर ध्यान देना आवश्यक है, वह है साइनोवियल लिक्विड, जो जोड़ों की गति के लिए जिम्मेदार जरूरी पदार्थ है। विशेषज्ञ के अनुसार, लंबे समय तक ठंडे तापमान और गतिहीनता के संपर्क में रहने पर यह द्रव गाढ़ा हो सकता है। यही कारण है कि कुछ लोगों को लंबे समय तक घर के अंदर रहने के बाद गर्दन में दर्द, पीठ के निचले हिस्से में जकड़न या घुटनों में तकलीफ महसूस होती है।
एसी में सोने से हो रहे दर्द और जकड़न को कैसे कम करें
अच्छी बात ये है कि लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने से परेशानी को कम किया जा सकता है। डॉक्टर माथुर के अनुसार, एयर कंडीशनर को सामान्य तापमान पर रखना चाहिए और पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, साथ ही हर 30-45 मिनट के बाद थोड़ा आराम करना चाहिए। थोड़ी देर टहलना, हल्का स्ट्रेचिंग व्यायाम या सिर्फ खड़े होना भी जोड़ों को एक्टिव बनाए रखने और ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है। अगर जोड़ों में अकड़न कई दिनों तक बनी रहती है और इसके साथ सूजन, त्वचा का रंग बदलना, तेज दर्द या रोजाना के काम करना मुश्किल हो रहा है तो डॉक्टर की सलाह लें।